हरिहर झा

जनवरी 12, 2018

दो इन्हें सम्मान

Filed under: अनहद-कृति,गीत — by Harihar Jha हरिहर झा @ 7:49 पूर्वाह्न
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अर्ध-नारी रूप का
शिव से लिया वरदान
नर उसे धिक्कारता क्यों, है नहीं कुछ भान।

कान्ह आते रहे जग में
नाची है राधा
वृहन्नला से ही क्यों
टूटती श्रद्धा?
भीष्म आदर-पात्र,
गाली क्यों बने शिखण्डी
पहेली अद्भूत तो,
हैं क्रुद्ध पाखण्डी
क्यों करो नफ़रत भला, दो इन्हें सम्मान।

विज्ञान अपने अस्त्र ले
देखा इन्हे  परखा
कड़कती थी धूप,
करूणा की हुई  बरखा
इनकी सदियों ने सहे
समाज के अन्याय
ईश-पुस्तक, मुहर झूठी
खुल पड़े अध्याय
धर्म की दीवार लांघो, दो इन्हें भी मान।

प्रकृति का
प्रयोग सहता कोई योगी
’गे’ अपराधी नहीं है
बिल्कुल नहीं रोगी
कुदरत ने सोच दी
दिल सदा उलझा रहे
तार जोड़े इनके भी
गीत कुछ सांझा रहे
प्रेम इनका नृत्य है, सुन लो मधुरी तान।

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