हरिहर झा

जून 14, 2016

दुल्हन का सपना

Filed under: अनहद-कृति,गीत — by Harihar Jha हरिहर झा @ 4:07 पूर्वाह्न
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तासे, ढोल बजे,
शहनाई में  दिल की बजी घंटियाँ।

धड़कन से दिल के तारों को
कँपना है
गीत राग  में
रंग भरा इक  सपना है

निखर मेहँदी
और महावर में कैसी  सजती दुनियाँ।

ठाटबाट हैं ,
गम दहेज सा अनचाहा
पौरुष का वरदान
उसे है मनचाहा

दिल  सम्राट सा
और  बड़ा ’समारट’ है  मेरा सैंयाँ।

भाव बने
रंगीन बादल आप स्वयं
मन  में चली हिलोरें
बनी भरतनाट्यं

शुरू नाच  हुआ
अप्सरा के पैरों में हैं  पैंजनियाँ।

कोई बचाये
जुदाई के चंगुल से
जोबन बैरी
तार खींचता बाबुल से

आंसू टपटप बहें
बखत बिदाई मिलें गलबहियाँ।

http://www.anhadkriti.com/harihar-jha-dulhan-kaa-sapna

 

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फ़रवरी 20, 2008

मधुशाला के नाम

Filed under: गीत,साउथ एशिया टाइम्स,हिन्द-युग्म — by Harihar Jha हरिहर झा @ 12:42 पूर्वाह्न
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 चंचल आंखों की पीड़ा से छलक रहा क्यों जाम
आंखों से आंसू बहते हैं मधुशाला के नाम
  
कैसे बच पायेगा पंखी ठगी हुई सी आंखें
छाया विष हलाहल नभ में उड़ती दोनो पांखें
गले तीर के लग जाने के कैसे ये अरमान
चीर कलेजा क्षुधा मिटाने की मन में ली ठान

नरक बनी दुनिया सपने में आती स्वर्ग समान
आंखों से आंसू बहते हैं मधुशाला के नाम

मानमनावन कैसे हो दिल में हसरत की आग
अधर मौन होकर सोचे अब जागे मेरे भाग
दिल डूबा गहराई में भावों के स्वप्निल पंख
ओले बन अंगारे बरसे कलियां मारे डंख

शीतल छांव के दो पल, बदले में वियोग हाय राम !
आंखों से आंसू बहते हैं मधुशाला के नाम

खड़ा हुआ खलनायक देखो, बन कर भाग्य विधाता
हाय ! विदूषक मसखरी करता, सब्ज बाग दिखलाता
ठौर ना मिला प्रेम को, छलनी हुआ गया अब चैन
कैद हो गया अपराधी सा, अश्रुपूरित नैन

अमृत की दो बूंद जहर से मिल कर काम तमाम
आंखों से आंसू बहते हैं मधुशाला के नाम

Why Torture?

http://hariharjha.wordpress.com/2008/02/19/why-torture/

OR

http://hariharjha.wordpress.com