हरिहर झा

नवम्बर 14, 2007

धरा पर गगन

Filed under: अनुभूति,गीत — by Harihar Jha हरिहर झा @ 11:24 अपराह्न
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खुशियों की बौछार खिलखिलाता मौसम आया
उड़ता है मन मगन धरा पर गगन उतर आया

देवालय पर पूर्ण चन्द्रमा अनहोनी यह बात
दीप जल रहे लगता निकली तारों की बारात
फुलझडि़यों की माला निहारिकाओं का आभास
फूट रहे पटाखे बम चलते कदमों के पास

युवकों की शरारत मस्ती का आलम छाया
उड़ता है मन मगन धरा पर गगन उतर आया

चरणों में लक्ष्मी मैया के झुक झुक जाता माथ
मिठाइयां सूखे मेवे ले लेते भर भर हाथ
भागे दुख जंजाल छा गई दीप पर्व की माया
गोल घूम रहे ग्रह नक्षत्र स्वर्ग यहां लो आया

इन्द्रलोक की उर्वशी का नृत्य उतर आया
उड़ता है मन मगन धरा पर गगन उतर आया

खेल रहे खिलौनों से बन वायुयान के चालक
नई नई पौशाक अकड़ते खेल रहे हैं बालक
इन्तजार था महिनों से कि कब आये दिवाली
लटक मटकते झूम बजाते दो हाथों से ताली

तोतली बोली शिशुओं की  कितना आनन्द समाया
उड़ता है मन मगन धरा पर गगन उतर आया।

 – हरिहर झा

http://www.anubhuti-hindi.org/sankalan/shubh_deepawali/hariharjha.htm

Smiled the Sun :

http://hariharjha.wordpress.com/2007/02/16/smiled-the-sun/

OR

http://hariharjha.wordpress.com

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