हरिहर झा

दिसम्बर 21, 2019

आफत का पानी

Filed under: गीत,साहित्य-सुधा — by Harihar Jha हरिहर झा @ 3:22 पूर्वाह्न
कभी कहीं कोई बरसाता 
आफत का पानी   
तो कौन बकरा बने बलिदानी?  

लाया मुठ्ठी भर रोशनी,
अंधेरों से  लड़ा
आ धमके राहु केतु   
झपटे और ग्रहण पड़ा   
निर्दयी हाथ  ले लेते किस किसकी कुर्बानी     

डरा धमका कर गरीब को 
ले लेते हैं घेर   
पहन बघनखा खुद को 
मान लेते बब्बर  शेर    
शेखी बघार, दंभ भरे इठलाते अभिमानी  

खून भरा तिजोरी में,    
गहरे में बहुत छुपाया   
हुआ पराया हर कोई  
अपयश खूब कमाया   
तन्हाई खुद चालाकी से गुँथती निगरानी  

http://www.sahityasudha.com/articles_april_2nd_2018/kavita/harihar_jha/afat.html