हरिहर झा

अक्टूबर 28, 2019

स्वयं से जीत पाया कौन

Filed under: साहित्य सुधा — by Harihar Jha हरिहर झा @ 8:48 पूर्वाह्न
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ज्वालामुखी  
निकालती आग  धूँ धूँ  
दबाली , कुण्ठा  सभी लो दब गई। 
  
रक्तरंजित,  धन के लिये  
की  भागंभाग
मिर्गी चढ़ी, क्या मिला 
मुँह से निकले झाग 
सोंच ऐसी, 
पोटली धन से भरी  
ना जायेगी, ना  गई तो अब गई।  

सर्प सीढ़ी 
पार कर ली,  चढ़ते गये
सुरसा बने  
अरमान के मुख, बढ़ते गये   
झपकी लगी   
इधर बचपन सो गया 
बन बुढ़ापा  उमर, न जाने कब गई।

कीचड़ में 
भोग सारा,  पर अघाया कौन  
लड़ लड़ यहाँ, 
स्वयं से, जीत पाया कौन  
आँख मूँदे , 
ध्यान में,  नाचती नागिने,
डस रही थी निकाला तब गई। 
 http://www.sahityasudha.com/articles_march_2nd_2018/kavita/harihar_jha/swayam.html 
Ram and Ravan
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