हरिहर झा

अगस्त 16, 2018

इन्द्रधनुषी रंग मचलते

Filed under: गीत — by Harihar Jha हरिहर झा @ 11:23 पूर्वाह्न
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स्पर्श,
नयन का पा लेने को
इन्द्रधनुषी रंग मचलते।

स्वर लहरी
मचलती काहे
साँसो की सरगम क्या जाने
खूब मचलती जाती राहें
पैरों की रुनझुन को सुनने

मधुर नृत्य की ताल पकड़ने
मृदंग के धिग थाप मचलते।
कंगना थामे
पकड़ कलाई
ज्वार नशे का
पा जाये वो
प्यास नहीं
फिर भी मिट पाई
फूल बरसते छू ओठों को

अलकावली चूम लेने को
पंखुरियों के हार मचलते।

http://www.sahityasudha.com/articles_may_1st_2017/kavita/harihar_jha/indhradhanushi.html