हरिहर झा

जनवरी 10, 2017

बरगद के तले

Filed under: अतुकांत,अनहद-कृति — by Harihar Jha हरिहर झा @ 3:40 पूर्वाह्न

बरगद के तले
महकते फूलों की खुशबू
आती हुई पदचाप,
कोमल डालियाँ
मुलायम फूलों का स्पर्श
लटों की उलझन में फँसता
मैं गिरफ़्तार।

हरी-हरी घास का रेशमी बिछोना
ओंस की बूंदो का कोमल स्पर्श
पोर-पोर में समाती
झरते पानी की सुरीली आवाज़।

खिलखिलाते फूल
यह दिवास्वप्न या
रिसते घावों का करुण उपकथन…
एक गहरी प्यास की भूमिका।

हवा सुरसुराई कानों में
एक गुरूमंत्र –
पहाड़ी की घाटियों से गूँजता शंखनाद,
मंदिर के गुंबद से निकलता घंटनाद
भीतर मौन निःशब्द
लो शुरु हुआ अनहद नाद।

https://www.anhadkriti.com/harihar-jha-KUU1415-poem-bargad-ke-taley

 

 

Advertisements

टिप्पणी करे »

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं ।

RSS feed for comments on this post. TrackBack URI

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s

%d bloggers like this: