हरिहर झा

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साहित्यसुधा (परिचय)  http://sahityasudha.com/parichay/harihar_jha.html

अगस्त(प्रथम) २०१८:  मलहम मिले घाव पर   राधा खड़ी सदी से

जून (प्रथम) २०१८: लहरा रही पाती    पीड़ा चुभन की

अप्रेल (द्वितिय) २०१८:   आफत का पानी

मार्च (द्वितिय) २०१८:     नवप्रकाश सब को भाया  स्वयं से जीत पाया कौन

दिसंबर (द्वितिय) २०१७: जलन से उग जाते डंख  कैसे हो मेरे बिछुड़े मित्र!

नवम्बर (द्वितिय) २०१७:   फुसफुसाते वृक्ष कान में      आईना दिखाती  

अक्टूबर (द्वितिय) २०१७ :   मनमानी राह ले बैठा   गगरिया पनघट पे फूटी

११-१०/२०१६         (मन स्वयं बारात हुआ)     साहित्य-सुधा  (उलझा दिये हैं किस तरह )

( मई प्रथम २०१७) कोपल की लाचारी   इन्द्रधनुषी रंग मचलते 

( जुलाई द्वितिय २०१७) मैली हो गई बहुत चदरिया   कविराज बनते फिरते हो,

—  साहित्य-दर्शन (लिखना बाकी है)

कवितालोक (अंतर्ज्योति )

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(अनहद कृति, सा.कु., सेतु,Lekhni,आजादी क्यों?,सा.संध्या)

साहित्य-कुंज ( अक्तूबर प्रथम अंक, 2017 ) साहित्य घटिया लिख दियावो बहेलिया ,  चम्मच से तोते सीख गये खाना , तुरत छिड़ गया युद्ध

मई अंक  घाव दिये जो गहरे  परदुखकातर

( Open Books Online OBO )

अच्छे दिन थे

इतने मैले वस्त्र!

झूमता सावन

सुर्खियों में कहाँ दिखती?    पत्थरों को क्या कहें

कुछ सताते भी नहीं

सेतु जून २०१८  अनछुई छटपटाती वेदना  चिड़िया..

Setu November 2018   A Spiritual Feel, In Love

सेतु अक्टूबर २०१७ 

न हो उदास, न हो निराश   तू इतना तो बतला

अनहद कृति

जीवन नाच रहा है छमछम   क्या है गलती

गमो की आग

कैसे लिखूँ

(   अक्टूम्बर २०१७ )       दीपक कई जले ,   फरिश्ता आने वाला है 

लघुपत्रिका – शोध-लेख पर प्रतिक्रिया

कविता क्या है?  (परिशिष्ट)

दो इन्हें सम्मान

दंश का व्यवहार

दर्द भरी सिसकी है

भीग लिया(अनहद-कृति)

हुये रिटायर जॉब से

क्या लिखूँ मैं कविता

HforHindi

AZadi Kyon August 2016

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लेखनी :

Fibre of words “  and ” Be it Kargil or Gallipoli  ” in  Lekani

* हरिहर झा

यात्रा-वृत्तांत    :  न्यूजीलैंड          मार्च-अप्रेल 18

हास-परिहास :  दोपहर की चाय मार्च-अप्रेल 18

मैं अभागन  ( लेखनी-अंक 44-अक्तूबर-2010)

मेरी मरजी ( लेखनी-अंक 44-अक्तूबर-2010)

कौन सही, कौन गलत ( लेखनी-नवंबर-2013)

प्रकृति मौसी ( लेखनी-नवंबर-2013)

मुग्ध ( लेखनी-फरवरी-2014)

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