हरिहर झा

Latest_Published_Poems

Latest Published Poems: (ख) सेक्शन में;

(क) में ३ पुस्तकों के बारे में

(क) पुस्तकें:

English Poetry Book  Agony Churns My Heart

Hindi Poetry Book Bhig gayaa Mann

(भीग गया मन – संगीतकार और गायक – संदीप नागर)

फुसफुसाते वृक्ष कान में

(ख) नये कविता-संकलन :

१.

  • Amaravati Poetic Prism 2018  [14]
  • फुसफुसाते वृक्ष कान में(नवगीत संग्रह) [15] 
  • Taj Mahal Review  (Cyberwit) [16]

विश्व-हिन्दी-साहित्य अगस्त २०१८ में पृष्ठ ८४ पर: ’चल पड़ी है वेदना’

http://www.vishwahindi.com/hi/downloads/vhs/vhs2018.pdf

२.

भारती लिपि में : कलम गहो…   तथा लिखना बाकी है

(  87 में से दो रचनाओं का चयन   ७९ व ८० )
http://bharatiscript.com/media/Books/Literature/Hindi/HindiBooks.html
http://bharatiscript.com/media/Books/Literature/Hindi/uploadedDocuments/Kalam%20Gaho%20Hathon%20Mein%20Sath.pdf

http://bharatiscript.com/media/Books/Literature/Hindi/uploadedDocuments/Likhna%20Baki%20Hai.pdf

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(ख)  वेब पत्रिकाओं में:

सूची: अनुभूति, साहित्यसुधा, साहित्यकुंज, OBO, सेतु, अनहद कृति, HforHindi, लेखनी

अनुभूति में : सम दुखियारे

साहित्यसुधा (परिचय) ( सभी कवितायें) http://sahityasudha.com/parichay/harihar_jha.html

अक्टूबर(प्रथम) २०१८:  सुर्खियों में कहाँ दिखती?    पत्थरों को क्या कहें

अगस्त(प्रथम) २०१८:  मलहम मिले घाव पर   राधा खड़ी सदी से

जून (प्रथम) २०१८: लहरा रही पाती    पीड़ा चुभन की

अप्रेल (द्वितिय) २०१८:   आफत का पानी

मार्च (द्वितिय) २०१८:     नवप्रकाश सब को भाया  स्वयं से जीत पाया कौन

दिसंबर (द्वितिय) २०१७: जलन से उग जाते डंख  कैसे हो मेरे बिछुड़े मित्र!

नवम्बर (द्वितिय) २०१७:   फुसफुसाते वृक्ष कान में      आईना दिखाती  

अक्टूबर (द्वितिय) २०१७ :   मनमानी राह ले बैठा   गगरिया पनघट पे फूटी

११-१०/२०१६         (मन स्वयं बारात हुआ)     साहित्य-सुधा  (उलझा दिये हैं किस तरह )

( मई प्रथम २०१७) कोपल की लाचारी   इन्द्रधनुषी रंग मचलते 

( जुलाई द्वितिय २०१७) मैली हो गई बहुत चदरिया   कविराज बनते फिरते हो,

—  साहित्य-दर्शन (लिखना बाकी है) कवितालोक (अंतर्ज्योति )

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( सा.कु., सेतु, अनहद कृति, Lekhni,आजादी क्यों?,सा.संध्या)

 साहित्य-कुंज:

हास्य-व्यंग्य कविता

कविता

किरन जब नभ में छाई

चोरनी पक्की , डूब गई लूटिया           

( अक्तूबर प्रथम अंक, 2017 ) —साहित्य घटिया लिख दियावो बहेलिया ,  चम्मच से तोते सीख गये खाना , तुरत छिड़ गया युद्ध

मई अंक  —घाव दिये जो गहरे  परदुखकातर

( Open Books Online OBO )

अच्छे दिन थे

—इतने मैले वस्त्र!  झूमता सावन  कुछ सताते भी नहीं

सेतु दिसंबर २०१८  नववर्ष में धरा सुसज्जित आयें जीवन में परिवर्तन

सेतु जून २०१८  अनछुई छटपटाती वेदना  चिड़िया..

Setu November 2018   A Spiritual Feel, In Love

सेतु अक्टूबर २०१७ 

न हो उदास, न हो निराश   तू इतना तो बतला

अनहद कृति  में :

सितम्बर २९१९ दुल्हन-सी सजीली

२०१९  इतने मैले वस्त्र!  अचंभे में पड़ा हूँ मैं।

सुखद बड़ी मृगतृष्णा  पत्थर हैं पोगापंथी

जीवन नाच रहा है छमछम   क्या है गलती

गमो की आग

( मेरी धरोहर )

कैसे लिखूँ

(   अक्टूम्बर २०१७ )       दीपक कई जले ,   फरिश्ता आने वाला है 

लघुपत्रिका – शोध-लेख पर प्रतिक्रिया

कविता क्या है?  (परिशिष्ट)

दो इन्हें सम्मान

दंश का व्यवहार

दर्द भरी सिसकी है

भीग लिया(अनहद-कृति)

हुये रिटायर जॉब से

क्या लिखूँ मैं कविता

HforHindi

AZadi Kyon August 2016

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लेखनी :

Fibre of words “  and ” Be it Kargil or Gallipoli  ” in  Lekani

* हरिहर झा

आधुनिक माँ

जय हो हिन्दी भाषा की

यात्रा-वृत्तांत    :  न्यूजीलैंड          मार्च-अप्रेल 18

हास-परिहास :  दोपहर की चाय मार्च-अप्रेल 18

लेखनी सितम्बर २०१९ दस-लघुकथा में आठवी : आत्मसंवाद

मैं अभागन  ( लेखनी-अंक 44-अक्तूबर-2010)

मेरी मरजी ( लेखनी-अंक 44-अक्तूबर-2010)

कौन सही, कौन गलत ( लेखनी-नवंबर-2013)

प्रकृति मौसी ( लेखनी-नवंबर-2013)

मुग्ध ( लेखनी-फरवरी-2014)

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