हरिहर झा

मई 2, 2013

उपलब्धि

Filed under: गीत — by Harihar Jha हरिहर झा @ 1:59 पूर्वाह्न
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डकार ली गड्डी नोटों की
फाँका चूरण थोड़ा

सिर पर पाँव धरे चढ़ना था
एक एक सीड़ी पर
हाथी के पैरों में पड़ कर
वार किया कीड़ी पर

लहूलुहान माथे पर आज
बरस रहा है कोड़ा

बमविस्फोट में नींद आई
बंसी ने झकझोरा
उमड़ घुमड़ कर भीगे बादल
मेरा पानी कोरा

जाऊँ मंगल पर विमान से
पंछी डालें रोड़ा

अश्वमेध से हाँसिल कर लूँ
सपनो ने भरमाया
पूर्णाहुति स्वयं की देकर
मन ही मन बौराया

हार गया जीवन से तो क्या
जीता मेरा घोड़ा

-हरिहर झा
http://www.boloji.com/index.cfm?md=Content&sd=Poem&PoemID=15673

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