हरिहर झा

अप्रैल 18, 2013

परदेस में होली

Filed under: Uncategorized — by Harihar Jha हरिहर झा @ 5:53 पूर्वाह्न

उदास मन के
साये में
होली खेली डरते डरते

“चैन न बिगड़े सोफे से”
रंगो का थैला बाँट दिया
बच्चों ने कुछ बात न मानी
गुस्से में आकर डाँट दिया

बिना मार ही
रोई मुन्नी
नीर नयन से झरते झरते

अवकाश नहीं, भागे ऑफिस
देर रात को थके थकाये
लेपटॉप में बोझिल ’खिड़की’
घर में खाना कौन पकाये

भूले हलवा
तंग आगये
बरगर पीज़ा चरते चरते

संडे को होली में, कह कर
हुल्लड़बाज विदेशी हमको
चुपड़े थे हम लाल गुलाबी
क्लिक किया अफसर ने हमको

पुलिस न पहचानी
हुलिये में
बचे इस तरह मरते मरते

-हरिहर झा

http://hariharjha.com/