हरिहर झा

जनवरी 4, 2012

त्योहार

Filed under: Uncategorized — by Harihar Jha हरिहर झा @ 2:50 पूर्वाह्न
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सद्भावना का इत्र सुगंधित इस फूल के हार में
रिमझिम बरस रही फुहार का , आनन्द त्योहार में

हार गई है रुदन-रागिनी मुस्काने झेल रही
सब के चेहरों पर हँसी की , फुलझड़ियां खेल रही

किरण निकली इन्द्रधनुष सी बादल से छन छन के
उजियारा लो फैल गया है गलियारे में मन के

चांदनी धरती पर दूध के सागर में नहा गई
साकीबाला छाई सजधज मधुशाला बहा गई

-हरिहर झा