हरिहर झा

जून 1, 2008

आश्वासन 2

( पिछ्ली कविता का शेष )

चित्रगुप्त ने जवाब दिया
हँसते हुये –
“कैसा स्वर्ग मत्रींजी ! याद कीजिये आपने
देश के गद्दारो के साथ
पकाई खिचड़ी
आपको तो कुम्भीपाक में पकाया जायगा
आपने जनता से किये थे झूठे वादे
दिये थे आश्वासन
बदले मे यह नरक – स्वर्ग से उल्टा
स्वर्ग का शिर्षासन है
और ये मेनका-उर्वशी की छवियां
स्वर्ग का आश्वासन है ।

– हरिहर झा

– हरिहर झा
http://merekavimitra.blogspot.com/2008/04/blog-post_18.html

“Who is wrong” and other 50 poems by further click:

http://poetry.com/Publications/display.asp?ID=P7382407&BN=999&PN=56

http://hariharjha.wordpress.com/2008/06/01/who-is-wrong/

 

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1 टिप्पणी »

  1. सही है.

    टिप्पणी द्वारा समीर लाल — जून 1, 2008 @ 2:18 अपराह्न |प्रतिक्रिया


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