हरिहर झा

सितम्बर 20, 2007

जहरीला सांप

Filed under: तुकान्त — by Harihar Jha हरिहर झा @ 12:07 पूर्वाह्न

भेष आदमी का धर कर आया जहरीला सांप

उगले जहर घृणा का कितना नाप सके तो नाप

 

नीच इरादा पूरा करने लिया धरम का डंडा

निर्बल का लहू चूस रहा हट्टा कट्टा मुस्टंडा

बुद्धि बल कुछ नहीं पास में लिया हाथ मे डंडा

स्वारथ पूरा करने नित अपनाता ये हथकंडा

खून खराबे देख गया मानवता का दिल कांप

भेष आदमी का धर कर आया जहरीला सांप

  

विधवा हो गई कईं सुहागिन जीवन अब दुश्वार

कितने बच्चे बिन मां के बस रोते हैं लाचार

मनचाही  मांगे रख दी फैलाया मृत्यु का डर

भोले भाले लोगों की हत्यायें करता कायर !

  

दूथ पिलाओ जहर उगल कर देता यह संताप

भेष आदमी का धर कर आया जहरीला सांप

  

चूहा बहादुरी दिखाता छिपी ढ़ोल मे पोल

मानव जीवन की मर्यादा लहू मांस से तो

गीद्ध लोमड़ी कैसे जाने जीवदया का मोल

रावण, कंस की दानवता को लिया हृदय मे घोल

क्रूर इरादे शैतानों के भांप सके तो भांप

भेष आदमी का धर कर आया जहरीला सांप

                                            (समर्पित  : आतंकवादियों को ) 

                                              हरिहर झा

  Who is “Lisa!”?read on :

  http://hariharjha.wordpress.com/2007/02/14/lisa/ 

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  http://hariharjha.wordpress.com     

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7 टिप्पणियाँ »

  1. झा जी, अच्छा लिखा है। लेकिन बिहार में पुलिस जिस तरह लोगों को मोटरसाइकिल से बांधकर खींचती है, भीड़ लोगों को पीट-पीटकर मार डालती है, फिर जानवरों की तरह उनकी लाश नदी में फेंक दी जाती है, इस हिंसा को आप क्या कहेगे। चोरो से लेकर आतंकवादियों को प्रश्रय ऊपर से ही मिलता है।

    टिप्पणी द्वारा अनिल रघुराज — सितम्बर 20, 2007 @ 3:04 पूर्वाह्न |प्रतिक्रिया

  2. बिलकुल सही कहा आपने!
    पर आतंकवादी परपीड़क होते हुये भी अभी तक
    मरे क्यों नहीं इसका खुलासा आप कीजिये ! 🙂

    टिप्पणी द्वारा Harihar Jha हरिहर झा — सितम्बर 20, 2007 @ 3:38 पूर्वाह्न |प्रतिक्रिया

  3. दूथ पिलाओ जहर उगल कर देता यह संताप

    भेष आदमी का धर कर आया जहरीला सांप

    बढ़िया लेखन..

    टिप्पणी द्वारा neerajdiwan — सितम्बर 20, 2007 @ 2:39 अपराह्न |प्रतिक्रिया

  4. बहुत सही कहा आपने हरिहर जी

    भेष आदमी का धर कर आया जहरीला सांप…

    मगर आतंकवादियों को समर्पण न करें

    समर्पित : आतंकवादियों को

    इसे तो ललकार : आतंकवादियों को

    होना चाहिये. जहरीला सांप और समर्पण, कुछ जंचता नहीं.

    🙂

    टिप्पणी द्वारा समीर लाल — सितम्बर 20, 2007 @ 3:58 अपराह्न |प्रतिक्रिया

  5. वे हमारे नेता होंगे जो बिटिया के लिये आतंकवादियों को समर्पण करते होंगे 🙂
    हमारी कविता बिटिया का निशाना किस ओर हॆ यह आपको बताने की
    आवश्यकता भी नहीं।

    टिप्पणी द्वारा Harihar Jha हरिहर झा — सितम्बर 20, 2007 @ 11:55 अपराह्न |प्रतिक्रिया

  6. धन्यवाद नीरज जी

    टिप्पणी द्वारा Harihar Jha हरिहर झा — सितम्बर 21, 2007 @ 12:01 पूर्वाह्न |प्रतिक्रिया

  7. आपका ब्लोग बहुत अच्छा लगा.
    ऎसेही लिखेते रहिये.
    क्यों न आप अपना ब्लोग ब्लोगअड्डा में शामिल कर के अपने विचार ऒंर लोगों तक पहुंचाते.
    जो हमे अच्छा लगे.
    वो सबको पता चले.
    ऎसा छोटासा प्रयास है.
    हमारे इस प्रयास में.
    आप भी शामिल हो जाइयॆ.
    एक बार ब्लोग अड्डा में आके देखिये.

    टिप्पणी द्वारा deepanjali — सितम्बर 25, 2007 @ 10:34 पूर्वाह्न |प्रतिक्रिया


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