हरिहर झा

अगस्त 23, 2007

प्यार की उमंग

Filed under: गीत,तुकान्त — by Harihar Jha हरिहर झा @ 12:58 पूर्वाह्न
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मोम की कसक जो दर्द बन गई

पिघलपिघल लौ से दूर हो गया

आंसुओं की गर्मी से कराह कर

खण्ड मे बंटा तो चूर हो गया

   

रागरागिनी के लय विलय हुये

छटपटाता भाव मौन हो गया

ग्रीष्म चूसता रहा समुद्र को

अंधकार चांद ही को डस गया

     

लड़झगड़ नदी सुमेरू श्रृंग के

केश घने खींच कर पकड़ रही

वायु भय से कांप कर लिपट रही

पर्वतों  की चोंटियां जकड़ रही

       

सुन विलाप जलप्रपात जब हंसा

क्यों हंसा जो गिर रहा पाताल मे

अन्तर्मुखी हो सुन रहा गाती हुई

माधुरी के स्वर अनोखी ताल में

   

किरन भी यह देख कर के हंस उठी

हंस उठी आकाश की गहराईयां

दूर हुई छिटक करके बह गई

खो गई लो गमो की परछाईयां

      

कलि मुस्कुराई देख कर सभी

चेहरे  खुशी से खिल रहे भले

चांदनी नजर मिलाती चांद से

फूल तितलियों से  मिल रहे गले

   

अभिसार  अर्चना का रूप ले

मेघ की उड़ान नृत्य बन गई

दामिनी का नृत्य प्यार हो उठा

प्यार की उमंग फिर बहक गई।

-हरिहर झा

For “Blackens your Face” read

http://hariharjha.wordpress.com

or

http://hariharjha.wordpress.com/2007/08/23/blackens-your-face/

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7 टिप्पणियाँ »

  1. अच्छी रचना है !!

    टिप्पणी द्वारा mamta — अगस्त 23, 2007 @ 4:58 पूर्वाह्न |प्रतिक्रिया

  2. वाह, क्या छटा है – सावन में प्रकृति भी छा गयी है और उमंग भी!

    टिप्पणी द्वारा ज्ञानदत पाण्डेय — अगस्त 23, 2007 @ 6:12 पूर्वाह्न |प्रतिक्रिया

  3. bahut sundar lagi aapki rachana ..

    टिप्पणी द्वारा ranjana — अगस्त 23, 2007 @ 6:27 पूर्वाह्न |प्रतिक्रिया

  4. धन्यवाद ममता जी व ग्यानद्त्त जी

    टिप्पणी द्वारा Harihar Jha हरिहर झा — अगस्त 23, 2007 @ 6:32 पूर्वाह्न |प्रतिक्रिया

  5. धन्यवाद रंजना जी इस बहाने आपकी कवितायें पढ्ने का मॊका मिला

    टिप्पणी द्वारा Harihar Jha हरिहर झा — अगस्त 23, 2007 @ 7:15 पूर्वाह्न |प्रतिक्रिया

  6. नवीन प्रतीकों-बिंबों की अभिव्यक्ति बहुत सुन्दर है…पूरी कविता एक विशेष आभा से अभिसिक्त है….बहुत बहुत बधाई…

    डा. रमा द्विवेदी

    टिप्पणी द्वारा ramadwivedi — अगस्त 24, 2007 @ 9:35 पूर्वाह्न |प्रतिक्रिया

  7. धन्यवाद डा. रमा जी

    टिप्पणी द्वारा Harihar Jha हरिहर झा — अगस्त 26, 2007 @ 8:03 पूर्वाह्न |प्रतिक्रिया


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