हरिहर झा

जून 27, 2007

चल तू अकेला

Filed under: तुकान्त,व्यंग्य,हास्य — by Harihar Jha हरिहर झा @ 11:51 अपराह्न

मियांबीबी दो झगड़ते थे भारी
सोंचा सुलह करवा देगें हम सारी

फंस गये मियांबीबी दोनो को झेला
दुनियां का मेला चल तू अकेला

घुसे थे भीड़ में लाटरी का चक्कर
पर हो गई जेबकतरे से टक्कर

बची अठन्नी ना रहा ना धेला
दुनियां का मेला चल तू अकेला

  
चढ़ गये स्टेज पर माइक हमने लेली
सोंचा कविता देगी रुपयों की थेली

भर गया फेंकी हुई चप्पल का थेला
दुनियां का मेला चल तू अकेला

चुनाव मे सिर दिया मेहनत से जुटे
विरोधि कमबख्त  ले चाकू  टूटे

लौट के बुद्धु घर आने की वेला
दुनियां का मेला चल तू अकेला

इंटरनेट पर हिरो होने का दावा
चट आगया ऐर्श्वया का बुलावा

उसकी आयु सनसठ हुआ झमेला
दुनियां का मेला चल तू अकेला

एकला चलो रे की आदत जो छुटी
लुटे और पिट गये किस्मत ही फूटी

अब तो बन जा तू टेगोर का चेला
दुनियां का मेला चल तू अकेला

                          -हरिहर झा

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8 टिप्पणियाँ »

  1. हरिहर भाई क्या लिखते हो..गज़ब बात है..आप भी ग्रेट हो…पति-पत्नी के बीच भला कोई बोल पाया है…

    शानू

    टिप्पणी द्वारा sunita(shaanoo — जून 28, 2007 @ 7:24 पूर्वाह्न |प्रतिक्रिया

  2. Hello Uncle,
    Very nice composition. All the poems are beautiful.Wish to see more of them.

    Regards,
    Aditi

    टिप्पणी द्वारा Aditi Yagnik — जून 28, 2007 @ 12:05 अपराह्न |प्रतिक्रिया

  3. Shaanoo Ji

    Dhanyavaad.

    -Harihar Jha

    टिप्पणी द्वारा Harihar Jha हरिहर झा — जून 29, 2007 @ 12:14 पूर्वाह्न |प्रतिक्रिया

  4. Aditi

    Dhanyavaad. Nice to know you like the poems.

    -Uncle

    टिप्पणी द्वारा Harihar Jha हरिहर झा — जून 29, 2007 @ 12:21 पूर्वाह्न |प्रतिक्रिया

  5. आप की कुछ कविताएं पढ़ीं। कही कहीं अकस्मात ही हंसी छूट गयी। ब्यग्य अच्छा लिखते हैं। उसी पर जोर दें। कवि कुलवंत सिंह

    टिप्पणी द्वारा kavi kulwant — जुलाई 2, 2007 @ 8:24 पूर्वाह्न |प्रतिक्रिया

  6. bhai sahab, aap to pure kavi hain.india me hote to rupyo ki thaile jaroor milti. aajkal chappal jute jyaadaa mahnge hain,

    टिप्पणी द्वारा Basant Arya — जुलाई 15, 2007 @ 9:55 पूर्वाह्न |प्रतिक्रिया

  7. Basant Ji

    Yah jaan kar badi tasalli ho rahi hei
    ki chappal jute bhi aajkal saste nahiN milte.

    टिप्पणी द्वारा Harihar Jha — जुलाई 16, 2007 @ 2:13 पूर्वाह्न |प्रतिक्रिया


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