हरिहर झा

मई 31, 2007

थरथर कांपे दिल मेरा

Filed under: हास्य — by Harihar Jha हरिहर झा @ 5:44 पूर्वाह्न

भेंट मे साड़ी दी बीबी को सस्ते में
नाम बड़ा था खरीद ली थी रस्ते में

सस्तेलाल की साड़ी चुगली कर ना दे ऐरागेरा
थरथर कांपे दिल मेरा

मटके मे तकदीर अपुन का जो चमका
खबर लग गई तुरत दरोगा आ धमका

मुठ्ठी  गरम करो पुलिस की थाने का छुटे फेरा
थरथर कांपे दिल मेरा

मारपीट से दूर खड़ा था मै डरता
भरी अदालत सच बोला मै क्या करता

गुन्डो की लाठी ने तबसे सपनो में  भी आ घेरा
थरथर कांपे दिल मेरा   

राह मे चोरों से कैसे बच पाउंगा
बोले बाबा डर मत  तुझे बचाऊंगा

गड़प कर गये बोले बच्चा कुछ ना तेरा
थरथर कांपे दिल मेरा।

                    -हरिहर झा

                 

Advertisements

मई 14, 2007

मौत भी थम जाये

Filed under: तुकान्त — by Harihar Jha हरिहर झा @ 1:56 पूर्वाह्न

अगर तुम ना जाओ मौत भी थम जाये
साथ हो तुम जैसा काल भी शरमाये

धड़कन जीवन की जगी सब अरमां जागे
प्रीत की डोर बंधी तो बंधे सपनो के धागे
दशायें जीवन पथ की ठगी सी रह जाती
दिशायें उलटपलट कर सपनो मे खो जाती

छबि मोहक हो ऐसी जादू क्यों न लुभाये
अगर  तुम ना जाओ मौत भी थम जाय
   
किसी पर नाजुक काया चोंट क्या कर पायेगी
नजर भर देखा जिसको घायल कर जायेगी
तुम्हारी तीखी चितवन रंग ऐसा लायेगी
बिना मांगे ही मुझको छोड़ चली जायगी

कहानी सत्यवान की अपने को दोहराये
अगर तुम ना जाओ मौत भी थम जाये

मलिनमुख काल स्वयं तो आईना देख न पाता
तुम्हारी ताकझांक कर सम्मुख कभी न आता
फिसल जाय पग पल मे अगर हो कहीं सामना
कह बैठे कोमल काया! मेरा तू हाथ थामना

नशीली नजरों से मौत खुद मर जाये
अगर तुम ना जाओ मौत भी थम जाये।

                      -हरिहर झा

For My will and pleasure :

http://hariharjha.wordpress.com/