हरिहर झा

July 21, 2009

गुनगुनाती हो !

Filed under: अतुकांत, हिन्द-युग्म — by Harihar Jha हरिहर झा @ 4:16 am
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क्यों पोत रही तुम
मेरी सूखी हड्डियों पर
इन्द्रधनुषी रंग
उतर कर मेरे आंगन में !
क्यों जम्हाई लेने के बदले
ले रही मनमोहक अंगड़ाई;
चीखो और चिल्लाओ !
रोको मत
बहने दो दुख भरे आँसूओं को
क्यों कि मैं तो विमूढ़ हूँ
देख कर तुम्हारे
प्रेम से छलछलाते नयन
तुम मन में उभरते अंधड़ को
मत छिपा दो अभिसार की याचना से;
इधर जब भी
मैं उलझता अपने डगमगाते दायरों में
तुम चहकती हो इसे मेरी सफलता समझ कर
भावों और शब्दों का तुम्हारा ऐसा जुगाड़
कि मुझमें माचो देख पाने की दलील
सुन कर
हो रहा मैं पसीने से तरबतर;
देख कर तुम्हारी आँखों में
प्यार की नमी का सैलाब
फँस जाता भंवर में
और तुम …
तुम्हारे कमल जैसे चेहरे पर
तैरते
अधखुली आँखों के तीर
मेरी कोशिकाओं से
टपकाते हैं
केवल खून !
पर तुम हो कि इस
मेरी दर्द में दबी
हिसहिसाहट को
ले कर अपने अधरों पर
गुनगुनाती हो !

-हरिहर झा
http://kavita.hindyugm.com/2009/06/blog-post_19.html

Pleasure or Pain? :
http://boloji.com/poetry/4001-4500/4085.htm

July 6, 2009

जनता की किस्मत फूटी

Filed under: अतुकांत, व्यंग्य, हिन्द-युग्म — by Harihar Jha हरिहर झा @ 4:46 am

झगड़ा हुआ नेताजी और पत्रकार में
मंहगाई की मार से बावले हुये पत्रकार ने
मला सिर पर बाम
लगाया नेताजी पर इलजाम
किसी कोमलांगी के बदन को छूकर
उसके घूंघट की ओंट से निकला एक विडियो टेप
दूसरे दिन व्यभिचार¸ दुराचार की
सुर्खियां छाई
बड़े बड़े अक्षरों में
हाय तौबा हुई
टांग खिंचाई की जनता ने
नाराज हो कर पत्रकारिता की गंदी चाल पर
नेता चिल्लाया और झल्लाया
गेर जिम्मेदार मिडिया पर
भनभनाया “उस दो कौड़ी के पत्रकार” पर
झगड़े मे फंसी युवती से
नाटक किया राखी का
शब्दों की बैसाखी का
उल्टा फंसाया कलमघीसू को
हथकड़ी पहनाकर
बाजार मे घुमाया
हुआ हंगामा सदन में
जब जनता रोती रही रोजी रोटी को
बिजली, पानी और सूखी खेती को
तो जिम्मेदार मिडिया और सूचना के नियन्त्रण पर
भाषण हुये एक्ट बनाने
असंतुष्टो को मनाने
सेमिनारों पर
रकम हुई स्वाहा
मुहं से निकला अहाहा !
मलाई गई नेताजी को
हिस्सा मिला पत्रकार को
मिलीभगत हुई, लड़ाई टूटी
पर दोनो की इस मारामारी में
जनता की किस्मत फूटी।

-हरिहर झा

http://kavita.hindyugm.com/2009/05/blog-post_15.html

Ram and Ravan :

http://poetry.com/dotnet/P7382407/999/34/display.aspx

 

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