नाटक…. विदेश में बस कर आँसू बहाने का… http://www.srijangatha.com/2008-09/august/kavita-%20harihar%20jha.htm
आस्ट्रेलिया आने के नुस्खे http://www.srijangatha.com/2008-09/Sept/austrelia%20ki%20chitthi-harihar%20jha.htm
बरसो रे बादल !
….बादल के बनने और बरसने का चक्र चालु रहना भी आवश्यक है; प्रवासियों को यह मूलभूत चिन्ता इसलिये सताती है कि यहां का माहौल हर कदम पर भारत का रहन-सहन व संस्कृति को निगलने तैयार बैठा है बल से नहीं, वातावरण के छल से।……
http://www.srijangatha.com/2008-09/oct/austrelia%20ki%20chitthi-harihar%20jha.htm
धर्म बनाम संस्कृति
….एकदेववाद और बहुदेववाद – इन दो असत्यों में एक को ऊँचा और दूसरे को निकृष्ट समझा जाय तो इसका प्रतिकार तो मुझे करना ही था ।…..
http://www.srijangatha.com/2009-10/march/astrelia%20se.htm
सहा नहीं जाता
(एक गज़ल)
http://www.srijangatha.com/2009-10/June/chand-gazal_harihar_jha_1.htm
झूठ के भीतर
शेक्सपीयर की एक सोनेट को हिन्दी में पढ़िये….
http://www.srijangatha.com/2009-10/June/bhashantar-harihar_jha_1.htm
दोपहर की चाय
…रंगे सियार की भांति मुझे भी अपनी स्वाभाविक आदत को अभिव्यक्ति देने की हूक उठी । सोंचा – एक कप चाय बना करके कर दे अपने अरमान पूरे ।….
http://www.srijangatha.com/2009-10/June/shesh-vishesh_Australia_se_harihar_jha_3.htm