( पिछ्ली कविता का शेष )
चित्रगुप्त ने जवाब दिया
हँसते हुये -
“कैसा स्वर्ग मत्रींजी ! याद कीजिये आपने
देश के गद्दारो के साथ
पकाई खिचड़ी
आपको तो कुम्भीपाक में पकाया जायगा
आपने जनता से किये थे झूठे वादे
दिये थे आश्वासन
बदले मे यह नरक - स्वर्ग से उल्टा
स्वर्ग का शिर्षासन है
और ये मेनका-उर्वशी की छवियां
स्वर्ग का आश्वासन है ।
- हरिहर झा
- हरिहर झा
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“Who is wrong” and other 50 poems by further click:
http://poetry.com/Publications/display.asp?ID=P7382407&BN=999&PN=56
http://hariharjha.wordpress.com/2008/06/01/who-is-wrong/
सही है.
Comment by समीर लाल — June 1, 2008 @ 2:18 pm