हरिहर झा

October 24, 2007

फ्रायड ने देखा एक ख्वाब

फ्रायड ने देखा एक ख्वाब

मनुष्य जाति

जो मनोरोगों से ग्रस्त

मानसिक विकारों से त्रस्त

कैसे जगे बीमारी को

दूर भगाने की आस

हो हर ताले की

कुंजी उसके पास

  

फिर सपने मे देखा

झोली या डंडा

मुर्गी या अंडा

अंडे का फंडा

प्रत्येक का जरूर कोई अर्थ

लाठी नाग तलवार या चाकू

कूआ, खाई,  पहाड़ या राई

सब कुछ यौन पिपासा

सर्व  सेक्समयं जगत

सदा से भीतर की कुण्ठायें रोई

जब चेतन मन  बिल्ली की नींद सोया

दमित वासऩा  का चूहा

चुपचाप

अपना भेष बदल कर निकला

मानो फ्रायड ने

चतुर बिल्ली की तरह

नींद का ढ़ोग रच कर

जान लिया  चूहों का राज।

दंग रह गया फ्रायड

मन की गहराईयां बतलाते

ये सपने कितने सच्चे !

कि जैसे निरदोष बच्चे

बाकी झूठा इंसान

झूठी यह दुनियां।

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2 Comments »

  1. दंग रह गया फ्रायड

    मन की गहराईयां बतलाते

    ये सपने कितने सच्चे !

    कि जैसे निरदोष बच्चे

    बाकी झूठा इंसान

    झूठी यह दुनियां।

    –क्या बात है, बहुत खूब!!!

    Comment by समीर लाल — October 25, 2007 @ 12:32 am

  2. bahut sahi

    Comment by ashish maharishi — October 25, 2007 @ 4:52 am

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