हरिहर झा

June 21, 2007

कारगील हो या गेलीपोली*

Filed under: तुकान्त, मंच — by Harihar Jha हरिहर झा @ 2:16 am

मौत से आंखमिचोली

कारगील हो या गेलीपोली

  

जंग की शतरंज का वादा

कोई वजीर ना प्यादा

सीने मे लगती जब गोली

कारगील हो या गेलीपोली

  

लड़ कर जो शहीद हो जाता

इतिहास नया लिखवाता

खेल कर खून की होली

कारगील हो या गेलीपोली

 

दे अपने जीवन  को झांसा

रोती पत्नी को दे  दिलासा

नन्ही बिटिया  है बड़ी भोली

कारगील हो या गेलीपोली

   

शहीदों को सब देते आदर

आचार्य हो मौलवी फादर

आहुति सब धर्मों की बोली

कारगील हो या गेलीपोली

   

हतो वा प्राप्यसि स्वर्गं आकर

जित्वा वा दिल में उतर कर

गीता-बाइबल हमजोली

कारगील हो या गेलीपोली

-हरिहर झा

झा

*(संगीत-रूप में उपलब्ध)
 
 

1 Comment »

  1. Hello Uncle,

    Very nice composition. Enjoyed all the poems a lot. You have got amazing talent. Wish to see more of them.

    Comment by Aditi Yagnik — June 28, 2007 @ 11:58 am |Reply


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