हरिहर झा

May 31, 2007

थरथर कांपे दिल मेरा

Filed under: हास्य — by Harihar Jha हरिहर झा @ 5:44 am

भेंट मे साड़ी दी बीबी को सस्ते में
नाम बड़ा था खरीद ली थी रस्ते में

सस्तेलाल की साड़ी चुगली कर ना दे ऐरागेरा
थरथर कांपे दिल मेरा

मटके मे तकदीर अपुन का जो चमका
खबर लग गई तुरत दरोगा आ धमका

मुठ्ठी  गरम करो पुलिस की थाने का छुटे फेरा
थरथर कांपे दिल मेरा

मारपीट से दूर खड़ा था मै डरता
भरी अदालत सच बोला मै क्या करता

गुन्डो की लाठी ने तबसे सपनो में  भी आ घेरा
थरथर कांपे दिल मेरा   

राह मे चोरों से कैसे बच पाउंगा
बोले बाबा डर मत  तुझे बचाऊंगा

गड़प कर गये बोले बच्चा कुछ ना तेरा
थरथर कांपे दिल मेरा।

                    -हरिहर झा

                 

No Comments »

No comments yet.

RSS feed for comments on this post. TrackBack URI

Leave a comment

Powered by WordPress.com