हरिहर झा

May 14, 2007

मौत भी थम जाये

Filed under: तुकान्त — by Harihar Jha हरिहर झा @ 1:56 am

अगर तुम ना जाओ मौत भी थम जाये
साथ हो तुम जैसा काल भी शरमाये

धड़कन जीवन की जगी सब अरमां जागे
प्रीत की डोर बंधी तो बंधे सपनो के धागे
दशायें जीवन पथ की ठगी सी रह जाती
दिशायें उलटपलट कर सपनो मे खो जाती

छबि मोहक हो ऐसी जादू क्यों न लुभाये
अगर  तुम ना जाओ मौत भी थम जाय
   
किसी पर नाजुक काया चोंट क्या कर पायेगी
नजर भर देखा जिसको घायल कर जायेगी
तुम्हारी तीखी चितवन रंग ऐसा लायेगी
बिना मांगे ही मुझको छोड़ चली जायगी

कहानी सत्यवान की अपने को दोहराये
अगर तुम ना जाओ मौत भी थम जाये

मलिनमुख काल स्वयं तो आईना देख न पाता
तुम्हारी ताकझांक कर सम्मुख कभी न आता
फिसल जाय पग पल मे अगर हो कहीं सामना
कह बैठे कोमल काया! मेरा तू हाथ थामना

नशीली नजरों से मौत खुद मर जाये
अगर तुम ना जाओ मौत भी थम जाये।

                      -हरिहर झा

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8 Comments »

  1. सही और सुंदर भाव हैं और शब्दों में उन्हें सही तरीके से उकारा गया है, बधाई.

    Comment by समीर लाल — May 14, 2007 @ 2:09 am

  2. बहुत खूब!

    Comment by अनूप शुक्ल — May 14, 2007 @ 2:50 am

  3. सुन्दर लिखा है । भाव भी बहुत सुन्दर हैं किन्तु
    ‘अगर तुम ना जाओ मौत भी थम जाये
    साथ हो तुम जैसा काल भी शरमाये’
    ये पंक्तियाँ क्या ठीक हैं ? काल का शरमाना, मेरे मन में कुछ संशय पैदा कर रहा है । हो सकता है कोई कविता का सही जानकार बता पाए ।
    आशा है आप अन्यथा न लेंगे ।
    घुघूती बासूती

    Comment by ghughutibasuti — May 14, 2007 @ 2:55 am

  4. Ghughooti Baasooti Ji
    Aapki TippaNi ke liye Bahut Dhanyavaad.

    काल भी शरमाये ki vyaakhyaa nimna kaDi me spashta roop se ki gayee hei.

    मलिनमुख काल स्वयं तो आईना देख न पाता
    तुम्हारी ताकझांक कर सम्मुख कभी न आता
    फिसल जाय पग पल मे अगर हो कहीं सामना
    कह बैठे कोमल काया! मेरा तू हाथ थामना

    Apne upnaam ( Ghughooti Baasooti ) ke baare
    me hameM kuch bataaiye.
    -Harihar Jha

    Comment by Harihar Jha हरिहर झा — May 14, 2007 @ 6:46 am

  5. बहुत सुन्दर रचना है।प्रमाण भी अच्छा दिया है।

    कहानी सत्यवान की अपने को दोहराये
    अगर तुम ना जाओ मौत भी थम जाये

    Comment by paramjitbali — May 14, 2007 @ 6:50 am

  6. Samir Ji

    Achchhaa lagaa yah jaan kar ki kavitaa aapko pasan aayee.

    -Harihar Jha

    Comment by Harihar Jha हरिहर झा — May 14, 2007 @ 6:51 am

  7. Paramjit Ji

    Bahut Dhanyavaad aapki TipaNi ke liye.

    -Harihar

    Comment by Harihar Jha हरिहर झा — May 14, 2007 @ 6:57 am

  8. Anoop Ji

    Dhanyavaad. Achchha lagaa jaan kar ki kavitaa aapko pasand aayi.

    -Harihar Jha

    Comment by Harihar Jha हरिहर झा — May 14, 2007 @ 7:02 am

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