भाग्य नहीं बदलता
सच कहा है
नियति पर किसी का वश नहीं चलता
इंसान अपना भाग्य नहीं बदलता
पत्ता पत्ता इश्वर की आज्ञा से हिलता है
वह चाहे तो
बेमौसम फूल खिलता है
विधि का विधान
क्या बदलेंगे देवदूत
हाथ की लकिरें हैं
सिमेंट सी मजबूत
भले ही विज्ञान ने
दुनियां की शक्ल बदल डाली
दवाओं ने इंसान की
उम्र बदल डाली
पर बदलने वाले हैं वे जो अभी नासमझ हैं
अक्ल के कच्चे हैं
जो दर्शन और संस्कृति के ज्ञान मे
अभी बच्चे हैं
वे जूझते हैं टकराते हैं
धरती की धूल उड़ा कर
ग्रहों मे पत्थर ढुंढते हैं
चांद के बाद मंगल मे
क्या राशियों का मिलान ढुंढते है?
नादान !
समझ ले किस्मत का लिखा हुआ
किस्मत तेरे हाथ मे धरेगा
भाग्य मे लिखी इसी मंगल को मौत
तो तू मंगल को मरेगा
यह बात अलग
कि किसी टीके के प्रभाव मे
बीस साल बाद
तू बुध को मरा
तो भाग्य की बदलाहट को
जानेगा कैसे ?
बिना पढ़े भाग्य का परिवर्तन
पहचानेगा कैसे ?
कहेगा किस्मत मे था सो हुआ
क्योंकि किस्मत से डरना था
समझेगा बुद्धू यही कि
तुझे बुध को मरना था।
- हरिहर झा