हरिहर झा

February 16, 2007

ऐसा बोर सैयां

Filed under: अतुकांत, मंच, व्यंग्य, हिन्दीनेस्ट — by Harihar Jha हरिहर झा @ 10:51 am

रंग फेका लाल गुलाबी
वो वेवलेन्थ की बात करने लगा
बुद्धु नादान सैयां
आइन्स्टीन को मात करने लगा

मैंने छोड़ी पिचकारी
वो हवा के दबाव की बात करने लगा
खिला दी मैंने कुछ मिठाई
शुगर की चिन्ता दिनरात करने लगा

गिनी चुनी लकडि़यां
भाई लोगों ने इकठ्ठा की
जलती होली देख कर
पर्यावरण की बात करने लगा  

समझाया असत्य पर
सत्य की होती विजय
होलिका जली प्रह्लाद बच गया
वो फायरप्रूफ कपड़ों की बात करने लगा

फिल्मी स्टार झूमे नाचे
दे गये होली का रंग
देखी मस्ती टी वी पर
टी वी के एन्टेना की बात करने लगा

गीत कवित्त भजन
होलीरस मे डुबा गये
हुल्लड़टोली की गाली सुन कर
भाषाव्याकरण की बात करने लगा 

राधा किशन का होलीरास
मथुरा मे शुरू होने लगा
ऐसा बोर सैयां 
वो द्वारका की खुदाई की बात करने लगा

 हरिहर झा
मार्च 15ई 2005

http://www.hindinest.com/kavita/2003/091.htm

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