हरिहर झा

March 11, 2007

आपका मत

by Harihar Jha हरिहर झा @ 7:44 am

 धन्यवाद:

http://hgdp.blogspot.com/2007/09/blog-post_10.html

…..कई बार यह सोचना इतना ज्यादा हो जाता है कि कमेण्टियाने के धर्म का पालन नहीं होता. हरिहर झा जी को भी मैं सीरियसली लेता हूं. बसंत आर्य यदा-कदा ठहाका लगा लेते हैं….

http://chitthacharcha.blogspot.com/2007/04/blog-post_15.html

“हरिहर ने टीसती रचना मेरी मर्जी शीर्षक से लिखी है।”

http://hindi-blog-podcast.blogspot.com/2007/03/new-posts-for-february-3-2007-and.html

हिंदी कविता में नया साल
समकालीनता के परिप्रेक्ष्य में
—डा जगदीश व्योम 

ऐसे माहौल में भविष्य का क्या पता, इसलिए क्यों न आज थोड़ी ख़ुशियों के साथ कुछ पल गुज़ार लिए जाएँ-
तुम सच कहते हो-
कल किसी आतंकवादी बम से
आसमान फट पड़ेगा
तो मेरी फटी कमीज़ के तार-तार से
आसमाँ को भी सी दूँगा
पर आज मेरे दिल की नसें मत चिरने दो
यारों मुझे साल मुबारक कर लेने दो
-हरिहर झा

    पतझड़ Harihar Jha हरिहर झा Mon Feb 26 14:45:09 IST 2007 (हरिहर झा)
    चुप हूं Harihar Jha हरिहर झा Sat Feb 17 00:36:11 IST 2007 (हरिहर झा)

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